पुलिस सत्यापन, सीसीटीवी लगाने के आदेश के विरोध में आज निजी स्कूलों में लगाएंगे काले झंडे

दैनिक भास्कर
News Dated: 
12-Oct-2017

संवाददाता | झुंझुनूं | गुरुग्रामके एक निजी स्कूल में छात्र की हत्या के बाद केन्द्र और राज्य सरकारों तथा सीबीएसई एवं राज्यों के स्कूल बोर्ड से रोज-रोज आने वाले निर्देशों से निजी स्कूलों के संचालक भारी परेशानी महसूस कर रहे हैं। नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (एनआईएसए) के आह्वान पर देशभर के निजी स्कूल 12 अक्टूबर को काला दिवस मनाएंगे। राज्य के हिन्दी माध्यम स्कूलों में दीपावली के अवकाश शुरू हो चुके हैं लेकिन अंग्रेजी माध्यम सीबीएसई स्कूल जो अभी चल रहे हैं उनके शिक्षक काली पट्‌टी बांधकर पढ़ाएंगे। कर्मचारी भी ये पट्‌टी लगा कर कार्य करेंगे। विद्यालय भवन तथा बसों पर काले झंडे लगाए जाएंगे।

यह जानकारी बुधवार को स्कूल क्रांति संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. दिलीप मोदी ने प्रदेश अध्यक्ष हेमलता शर्मा तथा राजस्थान प्राइवेट एज्यूकेशन एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कैलाशचंद्र शर्मा के साथ व्यापक विचार विमर्श के बाद दी।डॉ मोदी ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों और प्राचार्यों तथा संचालकों को प्रताड़ित करना, उन्हें अपमानित करना तथा उन्हें जेल भिजवाने की धमकियां देना अनुचित है।

स्कूलों का काम गुणात्मक शिक्षा प्रदान करना है, परंतु उनका ज्यादातर वक्त इस समय दिन-प्रतिदिन आने वाले सरकारी गैर-जरूरी निर्देशों का पालन करने में खर्च हो रहा है। उन्होंने महिला शिक्षकों का पुलिस वेरीफिकेशन तथा मनोचिकित्सा जांच करवाए जाने पर केवल प्रश्नचिह्न लगाया बल्कि नैतिक रूप से भी इसे उचित नहीं माना। अतीत में जो दुखद घटनाएं हुई हैं, उनके मूल में नैतिकता का पतन और शासन द्वारा सुरक्षा का माहौल तैयार करने में नाकाम रहना है। शिक्षकों को केयर टेकर बनाने का प्रयास हो रहा है। डॉ मोदी ने कहा कि 12 अक्टूबर को काला दिवस मनाने के राष्ट्रव्यापी फैसले में प्रदेश के प्राइवेट स्कूल भी हिस्सा लेंगे।

सुश्री हेमलता शर्मा और प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश चन्द्र शर्मा ने कहा कि एक ओर तो सरकार फीस एक्ट लागू कर तीन साल के लिए फीस वृद्धि पर पाबंदियां लगा रही है और दूसरी और सिक्योरिटी कैमरा, पुलिस वेरिफिकेशन, मनोवैज्ञानिक टेस्ट, केयर टेकर की नियुक्ति, सुरक्षा के नाम पर नए-नए आदेश, ब्रिज कोर्स आदि आर्थिक बोझ स्कूलों पर थोपती जा रही है।

स्कूल बसों में महिला अध्यापिकाओं का पूरे समय सुरक्षा की दृष्टि से साथ रहना, टॉयलेट सार्वजनिक स्थानों पर ड्यूटी देना, स्कूल लगने से पहले और छुट्टी होने के बाद भी बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी वहन करने को अधिकांश महिला अध्यापिकाएं, प्राचार्य हैड मिस्ट्रेस प्रताड़ना की संज्ञा दे रही हैं। कई तो त्याग पत्र तक देने की बात कहने लगी है। ऐसे वातावरण में अच्छे टीचर्स के पलायन से स्कूलें चलाना मुश्किल होता जा रहा है। वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे अध्यापकों को नेशनल ओपन स्कूल से ब्रिज कोर्स करवाने की खाना पूर्ति करना भी गैर जरूरी है।