शिक्षा के मौलिक अधिकार के खिलाफ है यह कदम

दैनिक जागरण
News Dated: 
13-Jan-2016

दिल्ली देश की राजधानी है और यहां बच्चों को उनके मौलिक अधिकार से वंचित करना अनुचित होगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से स्कूलों को बंद किए जाने के लिए की जा रही तैयारी किसी भी सूरत में उचित नहीं है। वो ऐसी स्थिति में जब सरकार का सारा ध्यान स्कूली व उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नामांकन दर में इजाफे की ओर है। जिन 300 स्कूलों की बात की जा रही है वो दिल्ली के इन इलाकों में चल रहे हैं। वहां जमीन के लिए सरकार की ओर से निर्धारित अनिवार्यता को पूरा कर पाना बेहद मुश्किल है। पहला कारण वहा खाली जमीन उपलब्ध ही नहीं है और दूसरा कि जो लोग वहां छोटे स्कूल चला रहे हैं, उनका मुनाफा इतना नहीं है कि वो आसपास की लाखों रुपये कीमत की जमीन को खरीदकर स्कूल का विस्तार कर सके। अब बात आती है कि बिना वैकल्पिक इंतजाम किए क्या इन स्कूलों को बंद किया जाना चाहिए तो जवाब है कि कतई नहीं। देश में ऐसे कई मामले सामने आएं हैं, जिनमें खुद न्यायालय ने सरकार को इस बात का निर्देश दिया है कि पहले वो छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था का इंतजाम करे, तब मौजूदा व्यवस्था को बंद करें। जहां तक की दिल्ली की बात है तो शिक्षा निदेशालय इस बात की तैयारी कर रहा है कि इन स्कूलों के बंद होने से स्कूल से वंचित बच्चों को स्थानीय सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए। जहां तक मेरा मानना है कि अभिभावकों ने इन बजट स्कूलों का चुनाव इसलिए किया होगा क्योंकि उन्हें अपने बच्चों को उपलब्ध सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाना था। इस तरह सरकार जबरन अभिभावकों को इसके लिए मजबूर करती है तो गलत होगा।दिल्ली देश की राजधानी है और यहां बच्चों को उनके मौलिक अधिकार से वंचित करना अनुचित होगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से स्कूलों को बंद किए जाने के लिए की जा रही तैयारी किसी भी सूरत में उचित नहीं है। वो ऐसी स्थिति में जब सरकार का सारा ध्यान स्कूली व उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नामांकन दर में इजाफे की ओर है। जिन 300 स्कूलों की बात की जा रही है वो दिल्ली के इन इलाकों में चल रहे हैं। वहां जमीन के लिए सरकार की ओर से निर्धारित अनिवार्यता को पूरा कर पाना बेहद मुश्किल है। पहला कारण वहा खाली जमीन उपलब्ध ही नहीं है और दूसरा कि जो लोग वहां छोटे स्कूल चला रहे हैं, उनका मुनाफा इतना नहीं है कि वो आसपास की लाखों रुपये कीमत की जमीन को खरीदकर स्कूल का विस्तार कर सके। अब बात आती है कि बिना वैकल्पिक इंतजाम किए क्या इन स्कूलों को बंद किया जाना चाहिए तो जवाब है कि कतई नहीं। देश में ऐसे कई मामले सामने आएं हैं, जिनमें खुद न्यायालय ने सरकार को इस बात का निर्देश दिया है कि पहले वो छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था का इंतजाम करे, तब मौजूदा व्यवस्था को बंद करें। जहां तक की दिल्ली की बात है तो शिक्षा निदेशालय इस बात की तैयारी कर रहा है कि इन स्कूलों के बंद होने से स्कूल से वंचित बच्चों को स्थानीय सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए। जहां तक मेरा मानना है कि अभिभावकों ने इन बजट स्कूलों का चुनाव इसलिए किया होगा क्योंकि उन्हें अपने बच्चों को उपलब्ध सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाना था। इस तरह सरकार जबरन अभिभावकों को इसके लिए मजबूर करती है तो गलत होगा।

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