स्कूलों की खंडित मान्यता पर सरकार का रुख सकारात्मक

दैनिक जागरण
News Dated: 
13-Jul-2016

देश भर में बच्चों को 14 साल तक मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) का लाभ राजधानी के बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। कारण स्थानीय प्रशासन की ओर से लागू वे नियम हैं जिनके परिणामस्वरूप प्राथमिक शिक्षा के बाद अभिभावक अपने बच्चों को या तो सरकारी स्कूल में या फिर महंगी फीस अदा कर निजी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हैं। अभिभावकों की इसी समस्या के निदान की दिशा में अब दिल्ली सरकार की ओर से प्रयास शुरू हुए है।

कोऑडिनेशन कमेटी ऑफ पब्लिक स्कूल, दिल्ली में आरटीई विंग के प्रमुख चंद्रकांत सिंह के अनुसार वर्ष 2010 में लागू आरटीई एक्ट बच्चों को 14 साल तक मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है लेकिन दिल्ली में यह लाभ अधूरा है। कारण दिल्ली नगर निगम की ओर से स्कूलों को दी जाने वाली पांचवी तक की मान्यता है। चन्द्रकांत बताते है कि ऐसे छोटे स्कूलों की संख्या दिल्ली में करीब 1100 है और इन स्कूलों में अध्ययनरत बच्चे शिक्षा का अधिकार कानून के लागू होने के बावजूद जब छठीं कक्षा में जाते है तो इन्हें दूसरे स्कूल में दाखिले की जरूरत होती है ऐसे में यदि वो किसी अन्य आठवीं दसवीं तक चलने वाले निजी स्कूल का रुख करते है तो वहां पहले से ही गरीब कोटे के अंतर्गत दाखिला प्राप्त बच्चों के अध्ययनरत होने से उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलता है।

समस्या का समाधान निगम से मान्यता प्राप्त स्कूलों को तीन कक्षाओं की खंडित मान्यता देने से हो सकता है और इस संबंध में बीते दिनों सीधे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से गुहार लगाई थी। चंद्रकांत ने बताया कि इस मांग को लेकर एक मांगपत्र भी भेजा गया जिसे लेकर मुख्यमंत्री की ओर से जवाब आया है कि वो इस विषय में विचार कर रहे है। चन्द्रकांत के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय से मिले इस जवाब के बाद कुछ उम्मीद जगी है और संभव है कि जल्द ही इस दिशा में कोई सकारात्मक फैसला सरकार विद्यार्थियों के हित में ले।


सभी स्तर पर स्कूलों को मिले राहत : नीसा

नेशनल इंडीपेंडेंट स्कूल्स एलांइस (नीसा) के सचिव अमित चंद्रा कहते है कि खंडिता मान्यता में हमारी मांग है कि न सिर्फ प्राथमिक बल्कि दिल्ली में चल रहे सभी निजी स्कूलों को इस राहत के दायरे में लाया जाए। पांचवी तक के छोटे निजी स्कूलों को आठवीं तक (तीन कक्षाएं दूसरी पाली में), आठवीं तक के स्कूलों को दसवीं तक (दो कक्षाएं दूसरी पाली में) और दसवीं तक के स्कूलों को बारहवीं तक (दो कक्षाएं दूसरी पाली में) पढ़ाने की मंजूरी दी जाए। यदि ऐसा होता है तो न सिर्फ शिक्षा का अधिकार बल्कि दिल्ली के अन्य बच्चों के लिए भी स्कूली शिक्षा आसान हो जाएगी।


दिल्ली में उपलब्ध बजट निजी स्कूलों की स्थिति

  • पांचवी तक के स्कूल -1100
  • आठवीं तक के स्कूल - 900
  • दसवीं तक के स्कूल - 600
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